त्वरित उत्तर
ऑटिज़्म मस्तिष्क के विकास और दुनिया को अनुभव करने का एक अलग तरीका है। इसे मिटाने या ठीक करने का दावा उचित नहीं है। होम्योपैथी से ऑटिज़्म या उसके मुख्य लक्षणों का उपचार होने का भरोसेमंद प्रमाण नहीं है। विकासात्मक जांच, जरूरत के अनुसार स्पीच और ऑक्युपेशनल थेरेपी तथा बालरोग संबंधी सलाह में देरी न करें। [1, 2, 3, 5]
बच्चे के संवाद या विकास को लेकर चिंता हो तो परिवार पर इंटरनेट की सलाह और उपचार के वादों का दबाव बढ़ सकता है। ऑटिज़्म माता-पिता की गलती से नहीं होता। बच्चे को धैर्य से समझना, उसकी पसंद और असुविधा पहचानना तथा जरूरत के अनुसार सहयोग देना देखभाल की शुरुआत है।
विकासात्मक बालरोग विशेषज्ञ, स्पीच थेरेपिस्ट, ऑक्युपेशनल थेरेपिस्ट, स्कूल और परिवार मिलकर योजना बना सकते हैं। उद्देश्य बच्चे का संवाद, आराम, भागीदारी और रोजमर्रा की स्वतंत्रता बढ़ाना है। किसी वैकल्पिक उत्पाद के लिए यह योजना रोकना या निदान टालना ठीक नहीं है। [2, 3, 4]
हर बच्चे की जरूरत अलग होती है
परिवार बोलने में देरी, आंख मिलाने का अलग ढंग, बार-बार एक तरह का खेल, तेज आवाज या कपड़े के स्पर्श से परेशानी बता सकते हैं। कुछ बच्चों को चुनिंदा भोजन, नींद, बेचैनी या रोजमर्रा के बदलावों में कठिनाई होती है। साथ में कब्ज, पेट दर्द या बार-बार संक्रमण भी हो सकते हैं; इन्हें ऑटिज़्म का ही हिस्सा मानकर अनदेखा न करें। बच्चे की रुचियां, ताकतें और अपने तरीके से बात समझाने की कोशिश भी दर्ज करें। किसी एक संकेत से निदान नहीं होता। [1, 2]
विकासात्मक जांच पहले क्यों जरूरी है?
भाषा, खेल, विकास के पड़ाव या स्कूल में भागीदारी को लेकर चिंता हो तो बालरोग विशेषज्ञ से विकासात्मक आकलन के लिए संपर्क करें। वह जरूरत के अनुसार विकासात्मक बालरोग विशेषज्ञ या संबंधित टीम को भेज सकते हैं। जांच में परिवार की जानकारी, बच्चे का अवलोकन, स्कूल की प्रतिक्रिया और सुनने सहित दूसरी संभावित कठिनाइयों का आकलन शामिल हो सकता है। स्क्रीनिंग प्रश्नावली अकेले निदान नहीं करती। जांच या शुरुआती सहयोग को होम्योपैथी के परिणाम देखने तक न टालें। पहले सीखे शब्द, सामाजिक या चलने-फिरने के कौशल कम होने लगें तो जल्दी विशेषज्ञ की सलाह लें। [2]
स्पीच, दैनिक कौशल और स्कूल का सहयोग
जरूरत के अनुसार स्पीच और भाषा थेरेपी संवाद समझने और अपनी बात बताने में सहयोग देती है। संवाद बोलकर, इशारों, चित्रों या सहायक उपकरण से भी हो सकता है। ऑक्युपेशनल थेरेपी खाने, कपड़े पहनने और दैनिक कामों में भागीदारी पर काम कर सकती है। व्यवहार संबंधी सहयोग में परेशानी के पहले क्या हुआ और बच्चा क्या बताना चाहता है, इसे समझना उपयोगी है। योजना बच्चे के विकास स्तर के अनुसार प्रशिक्षित पेशेवर बनाएं और माता-पिता को उसे घर में अपनाने की मदद दें। [3, 4]
नींद, संवेदी असुविधा और पेट की समस्या की अलग जांच
नींद बिगड़ने, चिंता, चिड़चिड़ापन, पेट की परेशानी या संक्रमण का अपना आकलन और उचित उपचार होना चाहिए। इन्हें होम्योपैथी से ठीक होने वाला ऑटिज़्म का लक्षण न मानें। दर्द या अपनी जरूरत न बता पाना भी तीव्र अस्वस्थता का कारण हो सकता है। आवाज, रोशनी, स्पर्श, भोजन की बनावट और दिनचर्या में बदलाव से क्या फर्क पड़ता है, यह नोट करें। [3, 4, 5]
- सोने और जागने का समय, रात में जागना तथा दिन की नींद लिखें।
- तेज खर्राटे, नींद में दम घुटना या सांस रुकती दिखना हो तो बालरोग या नींद विशेषज्ञ की जांच कराएं। [4]
- कब्ज, पेट दर्द, भूख और बहुत सीमित भोजन की जानकारी दें; पोषण या बढ़ने की चिंता पर उचित सलाह लें। [4]
- संवेदी परेशानी कम करने के लिए बच्चे को समझ आने वाले संकेत, पूर्वानुमेय दिनचर्या और आराम के लिए जगह रखें। [4]
होम्योपैथी के बारे में कौन से दावे न मानें?
ऑटिज़्म को खत्म करने, बोलना निश्चित शुरू कराने या मुख्य विशेषताएं बदल देने के दावों का भरोसेमंद आधार नहीं है। नींद, चिंता, पाचन रोग या बार-बार संक्रमण में भी होम्योपैथी का स्थापित उपचार प्रमाण नहीं है। किसी उत्पाद को आजमाने के लिए थेरेपी, बालरोग उपचार या जांच न रोकें। इस्तेमाल किए जा रहे सभी उत्पादों और पूरक पदार्थों की जानकारी बच्चे की चिकित्सा टीम को दें। इस लेख से दवा या मात्रा न चुनें। [5]
परिवार की तैयारी और अगले महीने के लक्ष्य
एक वादे से दूसरे वादे तक जाते हुए बार-बार देखभाल बदलने से तय योजना जारी रखना कठिन हो सकता है। शुरू से यह लिखें कि बच्चे को आज किस चीज से सबसे ज्यादा परेशानी है। फिर टीम के साथ छोटे, जांचे जा सकने वाले लक्ष्य तय करें, जैसे कम रातें जागना, अपनी जरूरत बताने का तरीका सीखना या रोजमर्रा के काम में अधिक सहज भागीदारी। ये देखभाल के लक्ष्य हैं, किसी उत्पाद से परिणाम की गारंटी नहीं। परिवार के आराम और सहायता की जरूरत को भी योजना में शामिल करें।
- पुरानी विकासात्मक रिपोर्ट, बच्चे के कौशल और स्कूल की प्रतिक्रिया लाएं।
- नींद, भोजन, शौच, संक्रमण और संवेदी परेशानी के संक्षिप्त नोट रखें।
- वर्तमान स्पीच, ऑक्युपेशनल और व्यवहार संबंधी सहयोग तथा डॉक्टर की दवाओं की सूची दें।
- पूछें कि घर, स्कूल और थेरेपी में एक जैसी मदद कैसे दी जा सकती है।
कब जल्दी चिकित्सकीय मदद लें?
पहले सीखे कौशल कम होना, नया दौरा या बेहोशी, गंभीर सुस्ती, सांस लेने में कठिनाई या ऐसा संकट जिसमें बच्चा सुरक्षित न रहे, नियमित मुलाकात तक टालने की बातें नहीं हैं। सांस की कठिनाई, बेहोशी या तत्काल चोट के जोखिम पर आपात मदद लें। कौशल घटने पर बालरोग या बाल-तंत्रिका विशेषज्ञ की शीघ्र जांच कराएं। नई शारीरिक तकलीफ को केवल ऑटिज़्म या व्यवहार कहकर न छोड़ें। [2, 4]
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